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‘गजल सम्राट’ जगजीत सिंह (Jagjit Singh) को गुजरे हुए आज दस साल हो गए हैं, मगर उनकी रुहानी आवाज का जादू आज भी बरकरार है. वो हिन्दुस्तान के सबसे बड़े गजल गायकों में से एक थे. उन्होंने अपनी मखमली आवाज में ऐसे कई गजल गाएं, जो आज भी लोगों की जुबां पर है. ‘वो कागज की कश्ती’,  ‘होठों से छू लो तुम’, ‘तुमको देखा तो ये ख्याल आया’, जैसे गीत सुनते ही लोगों के दिल धड़क उठते हैं.

राजस्थान के श्रीगंगानगर में 8 फरवरी 1941 को जगजीत सिंह का जन्म हुआ था. उनके पिता अमर सिंह (Amar Singh) एक सरकारी कर्मचारी थे. वे ग्यारह भाई-बहन थे. आपको जानकर यह हैरानी होगी कि उनके पिता ने उनका नाम ‘जगमोहन’ (Jagmohan) रखा था, बाद में उनकी मां ने एक बुजुर्ग की सलाह पर ‘जगमहोन’ से जगजीत रख दिया. अपने नाम के अनुसार ही उन्होंने आने वाले वक्त में पूरे जग का दिल जीत लिया.

कभी बेहद गंभीर कवि थे जगजीत सिंह
बचपन से ही जगजीत सिंह (Jagjit Singh) को संगीत से प्रेम हो गया. जिस समय बच्चे खेल में अपना वक्त गुजारते थे, वे शेरो-शायरी, गीत-गजल की दुनिया में खोए रहते थे. सिर्फ नौ साल की उम्र में उन्होंने एक कवि सम्मेलन में खुले मंच पर अपनी परफॉरमेंस दी. इस मौके पर उन्होंने एक बेहद गंभीर कविता का वाचन किया.

AIR में गाकर की करियर की शुरुआत
संगीत की शुरूआती तामील उन्होंने पंडित छगन लाल शर्मा और उस्ताद जमाल खान से ली. प्रोफेशनल करियर की शुरूआत उन्होंने 1961 में ऑल इंडिया रेडियो में गाने से शुरू की. मगर उनकी असली मंजिल तो मुंबई थी. परिवार को बिना बताए वो 1965 में  मुंबई आ गए.

चित्रा से कैसे हुई मुलाकात
संघर्ष के दौरान ही उनकी मुलाकात चित्रा (Chitra) से हुई. चित्रा पहले से शादीशुदा थीं, मगर प्यार कहां किसी दीवार को मानता है. साल 1969 में पति से तलाक लेकर चित्रा और जगजीत एक हो गए.

बेटा के गम में बनाई थी संगीत से दूरी
जगजीत सिंह और चित्रा का एक बेटा भी हुआ, मगर कुदरत ने एक सड़क हादसे में उनके घर के चिराग को हमेशा के लिए बुझा दिया. इस घटना ने जगजीत को अंदर से हिला दिया. कुछ समय तक उन्होंने संगीत से दूरी बना ली.

बेटे के दर्द में गाया ‘चिट्ठी न कोई संदेश’
मगर फिर उन्होंने वापसी की, लेकिन बिल्कुल अगल अंदाज में. फिल्म ‘दुश्मन’ में उन्होंने ऐसा गीत गाया, जैसे इसके माध्यम से अपना पूरा दर्द बयां कर दिया हो. गीत के बोल थे ‘चिट्ठी न कोई संदेश, जाने वह कौन-सा देश, जहां तुम चले गए.

संगीत की दुनिया में हमेशा अमर रहेगी जगजीत सिंह की आवाज
अगर बात करें उनको मिले अवार्ड्स की तो उन्हें कई बड़े पुरस्कार मिले. साल 1998 में उन्हें साहित्य अकादमी अवार्ड से सम्मानित किया गया. साल 2003 में जगजीत सिंह को भारत सरकार ने पद्म भूषण सम्मान से नवाजा. इतना ही नहीं 2014 में सरकार ने उनके सम्मान में डाक टिकट भी जारी किया.  बेशक आज जगजीत सिंह हमारे बीच नहीं हैं, मगर उनकी आवाज संगीत की दुनिया में हमेशा अमर रहेगी.

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