Rajinikanth And his Best Friend Raj Bahadur Unknown Story Bhojpuri South Raya

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सौम्या कलसा/Soumya Kalasa

बॉलीवुड और साउथ सिनेमा (South Cinema) में अपने अलग अंदाज से राज करने वाले एक्टर रजनीकांत (Rajinikanth) को राष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड (National Film Award) में दादा साहब फाल्के पुरस्कार अवॉर्ड से नवाजा गया. इस दौरान उन्होंने इस अवॉर्ड को अपने जिग्री दोस्त राज बहादुर (Raj Bahadur) को समर्पित किया. एक्टर के जिग्री दोस्त उस समय के हैं, जब वो बस में कंडक्टर का काम किया करते थे. इनका याराना 50 साल पुराना है. ऐसे में आपको इनकी दोस्ती के बारे में बता रहे हैं. आइए जानते हैं…

रजनीकांत के फैन राज बहादुर (Rajinikanth And Raj Bahadur Friendship) को जानते हैं. यह व्यक्ति बेंगलुरु के चमराजपेट में रहता है. राज बहादुर ही वह व्यक्ति हैं, जिसने शिवाजी राव गायकवाड़ को रजनीकांत बनने के लिए प्रेरित किया. यही वह व्यक्ति हैं, जिसने रजनी को तमिल भाषा धड़ल्ले से बोलना सिखाया. इस बात को बहुत कम लोग ही जानते हैं कि इन दोनों की कहानी कृष्ण-कुचेला की पौराणिक कथा से मिलती-जुलती है. बस एक अंतर यह है कि दोनों ने कृष्ण से कुचेला की भूमिका की अनेक बार अदला-बदली की है. अभी दो सप्ताह पहले ही रजनीकांत अपने इस सबसे प्रिय दोस्त से मिलने बेंगलुरु आए थे और इस लेख के प्रकाशित होने के समय तक राज बहादुर दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिलने का जश्न मनाने के लिए रजनीकांत के चेन्नई स्थित घर पहुंच गए होंगे.

एक लोकप्रिय दोस्ती

‘हमारी दोस्ती 50 साल पुरानी है’, राज बहादुर ने न्यूज18 से कहा. ‘मैं उनसे 1970 में मिला, जब उन्होंने बस कंडक्टर के रूप में और मैंने ड्राइवर के रूप में नौकरी ज्वाइन किया. हमारे ट्रांसपोर्ट स्टाफ में वह सबसे अच्छे एक्टर थे. जब भी विभाग का कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम होता, रजनीकांत स्टेज पर कार्यक्रम देते थे. ड्यूटी खत्म करने के बाद भी वो विभिन्न नाटकों में काम करते थे. यह कहने की जरूरत नहीं है कि अभिनय करने में उनका कोई मुकाबला नहीं था.

Rajinikanth and Raj bahadur

‘मैंने उन्हें चेन्नई जाकर एक्टिंग का कोर्स ज्वाइन करने के लिए कहा. दो साल का एक्टिंग का कोर्स पूरा करने के बाद उस संस्थान ने एक कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें रजनीकांत ने एक्टिंग किया. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे प्रमुख फिल्म निर्माता के बालाचंद्रन. वह रजनी के पास आए और कहा, ‘सुनो लड़के, तमिल सीख लो’. रजनी मेरे पास आए और उन्होंने यह बात बताई. निर्देशक के बालचंद्रन ने इसके अलावा और कुछ नहीं कहा था, उन्होंने सिर्फ कहा था कि तमिल सीख लो. मैंने रजनी से कहा कि वह चिंता नहीं करे और मैंने उस दिन से उसे मुझसे सिर्फ तमिल में बात करने को कहा और इसके बाद, जो हुआ वह इतिहास बन गया.’

Rajinikanth and Raj bahadur

‘एक और बात है, जो राज बहादुर नहीं बताते पर रजनी ने खुद यह बात कई बार बताई है. राज बहादुर को पगार के रूप में ₹400 मिलते थे. जब वह रजनी को चेन्नई जाकर वहां ऐक्टिंग स्कूल में एडमिशन लेने के लिए बाध्य किया, तो उनको वहां खाली हाथ नहीं भेजा. वह रजनी को हर महीने अपने वेतन का आधा हिस्सा ₹200 भेजते थे. रजनी इसी पैसे के बल पर चेन्नई में दो-तीन साल का एक्टिंग का कोर्स पूरा कर पाए. राज बहादुर अब नौकरी से रिटायर हो गए हैं और अपने भाई के परिवार के साथ एक साधारण जिंदगी जी रहे हैं.

रजनीकांत भले ही बहुत बड़े स्टार हों, पर अपने दोस्त के लिए वह वही पुराने व्यक्ति हैं, जिनके साथ वो दुनिया भर की बात करते थकते नहीं थे. रजनी हमेशा ही राज बहादुर के घर अचानक पहुंचकर उनको अचंभित करते हैं. आम लोगों की नजर से बचने के लिए वह भेष बदलकर तड़के पहुंचकर उनके घर पर दस्तक देते हैं. कोई फोन नहीं करते, कोई संदेश नहीं भेजते, बस फ्लाइट पकड़ते हैं और अपने दोस्त के यहां आ धमकते हैं. यह 50 साल पुरानी दोस्ती है. राज बहादुर के घर में रजनी के लिए एक कमरा सुरक्षित है.

अचानक आनेवाला मेहमान

राज बहादुर कहते हैं कि ‘हम नहीं जानते कि वह कब आकर हमारे दरवाजे की घंटी बजा देंगे. सो उनके लिए हम कमरा हमेशा तैयार रखते हैं’. यह एक साधारण सा छोटा कमरा है, जिसमें एक चारपाई लगी है और बमुश्किल इसें एक और व्यक्ति नीचे सो सकता है. जब भी रजनी यहां आते हैं, दोनों दोस्त इस कमरे में बंद हो जाते हैं और घंटों बातें करते हैं. राज बहादुर चारपाई पर सोते हैं जबकि रजनी उनके पास जमीन पर लगे बिस्तर पर.’ सालों से यह क्रम जारी है. दोस्त और उनका परिवार रजनी को जरूरी एकांत (प्राइवेसी) देते हैं. राज ने बताया, ‘वह जब हमारे पास आते है तो हमारे लिए वह हमारे दोस्त शिवाजी ही होते हैं. वह सुपरस्टार नहीं होते, जिसे दुनिया जानती है. उन्हें कन्नड़ और बेंगलुरु काफी पसंद है. वह उस समय से थोड़ा भी नहीं बदले हैं.’ यहां तक कि पड़ोसियों को भनक तक नहीं लगती कि रजनीकांत यहां उनके पड़ोस में रहकर गए हैं.

Rajinikanth and Raj bahadur

राजनीकांत और कदलेकै परिशे

राज बहादुर ने मेले से जुड़ा एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि ‘रजनी को बेंगलुरु की सड़कों पर टहलना पसंद है. कई बार हवाई अड्डा से राज बहादुर के घर आते हुए वह घर से कुछ दूर पहले ही उतर जाते हैं और अल सुबह या देर रात अकेले बेंगलुरु की सड़कों पर चलते हुए आते हैं. एक बार रजनी ने प्रसिद्ध ‘कदलेकै परिशे’ जाने की इच्छा जताई. यह मूंगफली का वार्षिक मेला है, जो कि बेंगलुरु के बसवनगुडी में लगता है. राज बहादुर ने रजनी को भेष बदलने में मदद की और दोनों दोस्त मेला देखने के लिए बुल टेम्पल रोड पर चल दिए जहां मेला लगता है. रजनी ने इस मेले का भरपूर आनंद उठाया और किसी ने उनको पहचाना नहीं. पर एक लड़की को शक हो गया कि राज बहादुर के साथ चलनेवाला आदमी राजनीकांत है. वह राज बहादुर को नहीं जानती थी. लेकिन, किसी तरह वह उनके पास आई और पूछा कि क्या वह राजनीकांत हैं. दोनों दोस्त उस पर हंसे और कहा कि ‘उसे धोखा हुआ है. यह लड़की रजनी की जबरदस्त फैन थी और उसने बताया कि वह रजनी को उनकी आंख से पहचानती है और उसे विश्वास है कि उनके साथ चलने वाला यह व्यक्ति रजनी ही है और वह थोड़ा बहुत राज बहादुर के चहरे से भी परिचित थी क्योंकि उसने किसी टीवी इंटरव्यू में उसको काफी पहले देखा था. इससे पहले कि वह किसी ठोस नतीजे पर पहुंचती, दोनों दोस्त मेले से लापता हो गए. राज बहादुर ने बताया कि ‘इस घटना पर दोनों दोस्त काफी हंसे.’

दोस्त से पूछे बिना कुछ भी नहीं राज बहादुर आज भी रजनी के सर्वाधिक प्रिय दोस्त हैं. चाहे वह राजनीति में जाने या नहीं जाने का मामला हो या कोई और निजी मामला, राज बहादुर से पूछे बिना रजनी कोई फैसला नहीं लेते.

रजनी बस नंबर 10A के कंडक्टर थे, जो मैजेस्टिक से श्रीनगर के बीच में चलती थी. वह हनुमंतनगर में रहते थे जबकि राज बहादुर चामराजपेट में. दोनों ही इलाका एक दूसरे के काफी नजदीक है. उस समय भी उनका अपना खास स्टाइल था. वह यात्रियों को सिक्का उछालकर देते थे और यात्रा के दौरान उनका मनोरंजन करते थे. इतने सालों के बाद आज भी, 77 साल के राज बहादुर का केवल एक ही सबसे अच्छा दोस्त है जिसे दुनिया थलाइवा के नाम से जानती है. जब मंच से अपने परिवार के बदले सुपरस्टार ने अपने इस सबसे अच्छे दोस्त को धन्यवाद दिया तो उस समय दुनिया को भी इस बात का पक्का सबूत मिल गया.

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