Bruised Review Announcing the arrival of director Halle Berry with Bruised ps

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Bruised Review: कहा जाता है कि शराब जितनी पुरानी होती जाती है, उतना ही उसका स्वाद और असर बढ़ते जाता है. यह बात अभिनेत्री हैली बेरी (Halle Berry) पर सटीक तौर पर लागू होती है. हर साल उनकी कोई फिल्म रिलीज़ होती है जिसमें वो और जवान होती नज़र आती हैं, और खूबसूरत दिखाई देती हैं या फिर अपनी बॉडी कुछ इस क़दर मैंटेन कर के रखती हैं कि 20-21 साल की लड़कियां भी उनके सामने पानी भरते नज़र आती हैं. मॉडलिंग से अपना करियर शुरू करने वाली हैली ने फिल्मों में पहले रोमांटिक कॉमेडी फिल्में की लेकिन धीरे धीरे उन्होंने अपनी पर्सनालिटी को निखारा और अच्छे अभिनय वाली फिल्में की. 2001 में उन्हें “मॉन्स्टर्स बॉल (Monster’s Ball)” फिल्म में बेहतरीन अभिनय के लिए अकादमी अवार्ड भी मिला. इतिहास में ये अवार्ड जीतने वाली वे पहली और अभी तक की एकलौती अफ्रीकन-अमेरिकन एक्ट्रेस हैं. फिल्म “ब्रूस्ड” के साथ उन्होंने 55 साल की उम्र में निर्देशन के क्षेत्र में पदार्पण किया है. फिल्म निर्देशन और लेखन के नज़रिये से देखें तो एकदम कसी हुई है, बस कहानी में कोई नयापन नहीं है इसलिए दर्शकों को थोड़ा पका सकती है.

हैली बेरी एक मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स की जानी मानी फाइटर बनी हैं जिसका करियर उसी की बेवकूफी की वजह से ख़त्म हो चुका है. वो चाहती तो है अपनी पहचान वापस पाना लेकिन शराब की गन्दी लत ने उसे कमज़ोर किया हुआ है. उसके साथ उसका मैनेजर, पार्टनर और शराबी दोस्त रहता है जो उसे आगे बढ़ाने के बजाये उसे हतोत्साहित करता नज़र आता है. हैली की ज़िन्दगी नर्क है और ऐसे में उसे एक फाइट कॉम्पीटीशन में भाग लेने का मौका मिलता है जहां वो दिलो जान से तैयारी करने में जुट जाती है.

अचानक उसकी ज़िन्दगी में उसका 6 साल का बेटा आ जाता है जिसे वो अपने पूर्व पति के पास छोड़ आयी थी. बेटे ने अपने पिता की हत्या होते हुए देखी है इसलिए वो कुछ बोलता नहीं है. सभी रिश्ते नातों से परेशान हैली, अपने बेटे को एक बेहतर ज़िन्दगी देने के लिए कॉम्पीटीशन के लिए तैयारी करती है और मुक़ाबले जीतती रहती है. एक तगड़ी फाइटर से फाइनल होता है जहाँ 5 राउंड तक दोनों ज़बरदस्त लड़ती हैं लेकिन हैली एक अंक से हार जाती है. हालाँकि सभी दर्शक उसी का नाम लेकर आसमान गुंजायमान कर देते हैं. आखिर में हैली अपने बेटे के साथ एक नयी ज़िन्दगी बसाने के लिए चल पड़ती है और उसका बेटा पहली बार बोलता है “थैंक यू”.

ऐसी स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्में बहुतायत से बनती रही हैं. हर साल 2-4 फिल्में तो आ ही जाती हैं. एक हारा हुआ खिलाड़ी अपनी बिखरी हुई ज़िन्दगी को समेट कर अपने बच्चे या परिवार के लिए एक टूर्नामेंट या एक फाइनल मैच और खेलता है जहाँ वो अपना सम्मान फिर से पाता है और एक बेहतर ज़िन्दगी जीने की उसकी कोशिशें रंग लाती हैं. कहानी में कई सारे क्लीशे हैं. शुरुआत ही होती है एक फैन द्वारा हैली का पीछा कर के उसका वीडियो लेने की. हैली किसी समय की टॉप फाइटर थी लेकिन अब दिन ख़राब हैं. अगला क्लीशे है उसका शराबी मैनेजर और पार्टनर जो उसे फिर से तरक्की करते हुए नहीं देखना चाहता. एक अंडरग्राउंड क्लब में होने वाली फाइट में एक अनजान फाइटर द्वारा हैली को उकसाना, हैली का उसकी धुलाई करना, फिर टूर्नामेंट में भाग लेने का मौका मिलना, 6 साल के बेटे का अचानक ज़िन्दगी में चले आना और फिर ममत्व का जागना आदि इत्यादि. कहानी में लेश मात्र भी ओरिजिनल कुछ नहीं है. बॉक्सिंग और मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स पर इस किस्म की दसियों फिल्म बन चुकी है. सिल्वेस्टर स्टैलोन की रॉकी सीरीज हो या मिलियन डॉलर बेबी या फिर नेवर बैक डाउन सीरीज. हर कहानी में ऐसा ही होता है, बस प्रेजेंटेशन अलग अलग हो जाते हैं.

हैली बेरी का निर्देशन है तो कसा हुआ क्योंकि मिशेल रोसेंफार्ब की पटकथा में एक भी बोरिंग या डल सीन नहीं है. भावनात्मक दृश्य भी इतने नहीं है कि कहानी भटक जाए. इन सबके बावजूद ऐसा लगता है कि हैली बेरी को निर्देशिका बनने के लिए एक सफल फार्मूला की ज़रुरत थी. हर सीन सोच समझ कर रखा गया है. हर एक सीन को फ्रैंक जी डिमार्को के कैमरे ने कुछ ऐसे शूट किया है कि संघर्ष की गाथा नज़र आती है. क्लोज अप शॉट्स के साथ साथ मूविंग कैमरा रिकॉर्डिंग्स की वजह से फाइटिंग मैच में काफी असलियत नज़र आती है. हैली बेरी की बतौर अभिनेत्री मेहनत तो साफ़ नज़र आती है लेकिन कुछ अन्य कलाकारों की वजह से कहानी में थोड़ा दम आया है. हैली की ट्रेनर बुड़ाखान की भूमिका में शीला अतिम ने कमाल किया है. हैली के शराबी मैनेजर डेसी के तौर शमीर एंडरसन का किरदार महत्वपूर्ण है. इस बात में कोई दो राय नहीं है कि फिल्म हैली बेरी की है क्योंकि वो ही निर्देशिका और अभिनेत्री हैं, लेकिन एक महत्वपूर्ण बात ये भी है कि ये फिल्म पहले अभिनेत्री ब्लैक लाइवली करने वाली थीं. समीक्षकों को फिल्म अच्छी तो लगी और हैली के फैंस भी फिल्म की तारीफ कर रहे हैं लेकिन एक कमज़ोर कहानी पर कितनी बार एक जैसी फिल्म बनायीं जा सकती है.

फिल्म के अंदाज़ को देख कर लगता है कि इसे फेस्टिवल्स में दिखाने के लिए बनाया गया है क्योंकि ये हैली द्वारा निर्देशित पहली फिल्म है. इसके बावजूद इस फिल्म में हैली ने जो मेहनत की है वो काबिल ए तारीफ है. उन्होंने अपने सब कुछ इस फिल्म में झोंक दिया है. एक बार ये फिल्म देखने का मन बना सकते हैं, हालांकि नवीनता का अभाव खलने की पूरी सम्भावना है.

डिटेल्ड रेटिंग

कहानी :
स्क्रिनप्ल :
डायरेक्शन :
संगीत :

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