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दिलीप कुमार (Dilip Kumar) साहब बॉलीवुड के वो दिग्गज एक्टर जो हमेशा सिनेमा प्रेमियों के दिलों में राज करेंगे. आज वह हमारे बीच में नहीं हैं, लेकिन आज ही दिन दिलीप कुमार उर्फ मोहम्मद युसुफ खान (Mohammed Yusuf Khan) का जन्म हुआ था. दिलीप कुमार का जन्म 11 दिसंबर को साल 1922 (Dilip Kumar 99th Birth Anniversary) पाकिस्तान के पेशावर (Peshawar, Pakistan) शहर में हुआ था. उनके पिता का नाम लाला गुलाम सरवर था, जो फल बेचकर अपने परिवार का खर्च चलाते थे. विभाजन के दौरान उनका परिवार मुंबई आकर बस गया. उनका शुरुआती जीवन तंगहाली में ही गुजरा. पिता के व्यापार में घाटा होने के कारण वह पुणे की एक कैंटीन में काम करने लगे. यहीं देविका रानी की पहली नजर उन पर पड़ी और उन्होंने दिलीप कुमार को एक्टर बना दिया. देविका रानी ने ही ‘युसूफ खान’ की जगह उनका नया नाम ‘दिलीप कुमार’ रखा. आज उनकी जयंती पर बात करेंगे ‘लिविंग लेजेंड’ और ‘ट्रेजेडी किंग’ के नाम से मशहूर दिलीप साहब से जुड़े कई यादगार लम्हे और किस्सों के बारे में.

‘ट्रेजेडी किंग’ के नाम से मशहूर दिलीप साहब की तुलना किसी भी कलाकार से करना बहुत मुश्किल काम है. शुरुआती फिल्मों में तो वो ट्रेजेडी किंग और रोमांस करते नजर आए, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने स्क्रीन पर झापड़ रसीद करने शुरू किए और दिलीप साहब के हर थप्पड़ की गूंज सिनेमाहॉल से लेकर बॉक्स ऑफिस पर सुनाई देती रही.

कर्मा (1986)
निर्देशक सुभाष घई की इस सुपरहिट देशभक्ति वाली फिल्म में दिलीप कुमार ने बॉलीवुड का सबसे लोकप्रिय थप्पड़ अनुपम खेर की गाल पर रसीद किया था. डॉक्टर डैंग के किरदार में अनुपम खेर का किरदार जेलर राणा विश्व प्रताप ठाकुर के जेल में आता है और वहीं वो ऐतिहासिक सीन आता है जब दिलीप कुमार, डॉक्टर डैंग को तमाचा लगाते हैं. डॉक्टर डैंग कहता है कि इस थप्पड़ की गूंज पूरी दुनिया सुनेगी, लेकिन थप्पड़ लगने के बाद तो सब ऐसा ही कहते हैं.

मशाल (1984)
‘कर्मा’ वाला थप्पड़ लोकप्रिय जरूर है, लेकिन उतना जोरदार नहीं जितना अमरीश पुरी को फिल्म ‘मशाल’ में लगा था. यश चोपड़ा की इस सुपरहिट फिल्म में दिलीप कुमार पहले भाग में एक ईमानदार पत्रकार के रोल में नजर आते हैं. बिजनेसमैन अमरीश पुरी उन्हें रिश्वत देने के लिए आते हैं और ऐसा झापड़ खाते हैं कि आखिरी सीन तक दिलीप कुमार से डरते रहते हैं.

राम और श्याम (1967)
जुड़वां फिल्मों की सीरीज शुरू करने वाली इस फिल्म की तर्ज़ पर ही ‘सीता और गीता’, ‘चालबाज़’, ‘जुड़वा’, जैसी फिल्में सामने आई थी. इस फिल्म में राम की जगह अमीर घर में घुस आए श्याम का सामना जब दुष्ट मामा जी के किरदार को निभा रहे प्राण से होता है तो प्राण को लगते है करारे झापड़ और उनका विलेन वाला किरदार आ जाता है पटरी पर.

मुग़ल-ए-आज़म (1960)
के आसिफ की कालजयी फिल्म ‘मुग़ल-ए-आज़म’ में दिलीप कुमार का मधुबाला को मारा गया थप्पड़ आज भी फिल्मी किस्सों का अभिन्न हिस्सा है. प्यार के रिश्ते में कड़वाहट आ जाने के बाद बतौर सह कलाकार ‘मुग़ल-ए-आज़म’ इन दोनों की आखिरी फिल्म होनी थी. दोनों के बीच इतनी कड़वाहट आ चुकी थी कि दिलीप और मधुबाला सिर्फ सीन के दौरान ही एक-दूसरे के सामने आते. इसी फिल्म के दौरान जब एक सीन के लिए दिलीप कुमार को मधुबाला से एक कड़ा संवाद करना था तब दिलीप ने उन्हें थप्पड़ मार दिया था. इस थप्पड़ की स्क्रिप्ट में जरुरत थी या नहीं ये साफ तो नहीं लेकिन हां, युसुफ साहब का गुस्सा विलेन के साथ हीरोइन पर भी उतर गया.

शक्ति (1982)
अमिताभ बच्चन और दिलीप कुमार के अभिनय से सजी इस फिल्म ‘शक्ति’ को इसलिए भी याद किया जाता है कि ये उनकी साथ में एकमात्र फिल्म थी. इस फिल्म में भी दिलीप कुमार को अमिताभ पर जबर्दस्त गुस्सा आता है. लोगों को लगता है कि आज तो थप्पड़ लगा ही लगा लेकिन तभी अमिताभ की मां के किरदार में दिखने वाली राखी अपने पति दिलीप को रोक लेती है. वर्ना एंग्री यंगमैन की गाल पर स्लैप किंग का झापड़ लगना तय था.

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