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Film Review ‘The Unforgivable’: 2009 में 3 एपिसोड की एक मिनी सीरीज ब्रिटिश टीवी आईटीवी पर दिखाई गयी थी, जिसका नाम था ‘अनफॉरगिवन’. एक ऐसी लड़की की कहानी थी जिसने किशोरावस्था में पुलिसवाले को मार दिया था और उसे जेल हो गयी थी. जब लम्बी सजा काटने के बाद वो बाहर आती तो वो अपनी छोटी बहन को खोजने की कोशिश करती है जिसे किसी परिवार ने गोद ले लिया था. उस मृत पुलिस वाले के बेटे अपने पिता की मौत का बदला लेना चाहते हैं और यहां से शुरू होती है इस सीरीज की कहानी. ये सीरीज बहुत पसंद की गयी थी और इसने अवॉर्ड भी जीते थे. इस सीरीज पर ब्रिटैन के प्रोड्यूसर ग्रैहम किंग (एविएटर, बोहेमियन रहैप्सोडी, ह्यूगो, द डिपार्टेड जैसी फिल्मों के लिए अकादमी अवॉर्ड के लिए नामांकित) कई सालों से फिल्म बनाना चाहते थे.

2010 में उन्होंने एंजेलिना जोली को लेकर इस फिल्म की योजना भी बना ली थी. कई सालों तक इसकी स्क्रिप्ट पर काम चलता रहा और निर्देशक की खोज जारी रही. अंततः 2019 में इसे सैंड्रा बुलक के साथ बनाने का निर्णय लिया गया और जर्मन निर्देशिका नोरा फिंगशेटको बहैसियत निर्देशिका प्रोजेक्ट थमाया गया. नोरा ने इस से पहले ‘सिस्टम क्रैशर’ नाम की एक जर्मन फिल्म निर्देशित की थी जिसे दुनिया भर के क्रिटिक्स ने बहुत पसंद किया था. सिस्टम क्रैशर की रफ़्तार और कहानी को आगे ले जाने की उनकी तकनीक का इस्तेमाल उन्होंने ‘द अनफॉरगिवेबल’ में भी किया है. फिल्म धीमी है.

रूथ स्लेटर (सैंड्रा बुलक) को एक पुलिस शेरिफ की गोली मार कर हत्या करने के इलज़ाम में 20 साल की सजा होती है. जब वो जेल से छूटती है तो अपनी छोटी बहन केटी को खोजती है. उसे पता चलता है कि उसे किसी परिवार ने गोद ले लिया था. अपनी जड़ों से कटी रूथ, अपनी बहन की तलाश में और अपनी ज़िन्दगी फिर से शुरू करने की कोशिश में लग जाती है. दरअसल रूथ अपनी बहन केटी को बचाने के लिए जेल जाती है क्योंकि गोली धोखे से केटी से चलती है जिस से शेरिफ की मौत हो जाती है लेकिन रूथ इलज़ाम अपने सर ले लेती है. पुलिस शेरिफ का छोटा बेटा, रूथ से अपने पिता की हत्या का बदला लेना चाहता है। केटी की धोखे में वो केटी की बहन एमिली का अपहरण कर लेता है. एमिली के बदले वो रूथ की जान लेना चाहता है. किसी तरह से रूथ, एमिली को बचाती है और शेरिफ के बेटे को पुलिस पकड़ लेती है.

कहानी की रफ़्तार आम दर्शकों को बोर कर देती है. सैंड्रा बुलक जेल से अच्छे आचरण की वजह से समयावधि से पहले छूट जाती है. वहां से लेकर उसका काम तलाश करने तक की पूरी यात्रा मंथर गति से चलती है. शुरुआत में अगर दर्शक थोड़ा सब्र रख कर फिल्म देखें तो फिल्म आगे देखने का मन बन सकता है लेकिन निराशा ही हाथ लगेगी। सैंड्रा बुलक ने बिलकुल ही अलग तरह का किरदार निभाया है. साल ख़त्म होने से अभिनेता और अभिनेत्री ऐसी फिल्में रिलीज़ करते हैं जो अवॉर्ड के लिए बनायीं गयी हों. ये फिल्म सैंड्रा के लिए वही काम करेगी ऐसा लगता है. टीवी सीरीज सैली वैनराइट ने लिखी थी लेकिन फिल्म के लिए इसका रूपांतरण पीटर क्रैग, हिलेरी सेल्ट्ज़, कॉर्टनी माइल्स ने किया है. फिल्म को अच्छे लेखन से ही बचाया जा सकता है लेकिन ये तीनों इसमें असफल रहे हैं.

कहानी में सब कुछ एकदम तयशुदा लगता है तो इसमें बहन की खोज वाली मिस्ट्री बिना बात का तड़का है. विचित्र बात है कि 20 साल की सजा (भले ही अच्छे व्यवहार से कम हो गयी हो) के बाद भी रूथ अपनी नन्ही बहन को ढूढ़ने की कोशिश करती है बिना ये सोचे समझे कि इतने समय बाद तो वो बहन बड़ी हो गयी होगी, उसे शायद कुछ याद भी नहीं होगा और वो अपनी नयी ज़िन्दगी में खुश होगी. छोटी बहन केटी को अपने अतीत से जोड़े रखने के लिए धुंधली यादों और सपनों का सहारा लिया गया है जहां उसे क़त्ल की घटना के कुछ दृश्य नज़र आते हैं लेकिन कुछ भी साफ़ नज़र नहीं आता. ऐसे में उसे रूथ कैसे याद रह जाती है? उसे 10-15 साल बाद रूथ की शकल कैसे पहचान में आएगी इस बारे में पटकथा कुछ नहीं कहती.

इस बीच में फ्लैशबैक भी है जहां शेरिफ के हत्या केटी के हाथों हुई थी ये दिखाया गया है लेकिन वो बहुत छोटी है इसलिए बड़ी बहन इलज़ाम अपने सर ले लेती है. सोचने वाली बात है कि अगर 16-17 साल की बहन अपनी 5 साल की बहन को बचाने के लिए जेल जा रही है तो उसको ये याद नहीं है कि उसके मां बाप अब इस दुनिया में नहीं हैं और उसके जेल जाने के बाद 5 साल की बच्ची का क्या होगा? अजीब मूर्खता है. 5 साल की बच्ची का रिहा होना आसान होता, उस पर गलती से फायरिंग का केस लगता और शायद सज़ा न भी होती. लेकिन बड़ी बहन को कुर्बानी तो देनी है न वरना फिल्म कैसे चलेगी?

कहानी के एक हिस्से में अपनी बहन को ढूंढने के लिए रूथ अपने पुराने मकान तक पहुंच जाती है, जो कि फार्म हाउस की तरह होता है. जो परिवार वहां अब रहता है उसमें पति वकील निकल आता है. उस पूरे परिवार को ये भी नहीं पता होता कि इस घर में हत्या हो चुकी है लेकिन दीवारों में से छोटे बच्चे के जूतों का निकलना उन्हें डराता भी नहीं है. ये कैसे संभव है? बहन तक पहुंच जाने के बाद कहानी ख़त्म हो जाती इसलिए एक बदले का किस्सा भी है. शेरिफ के छोटा बेटा अपने पिता की हत्या का बदला लेना चाहता है. उसे ये तक पता होता है कि रूथ को अच्छे आचरण की वजह से जेल से जल्दी छोड़ा जा रहा है और उसे वो दिन भी पता होता है कि वो कब और कितने बजे रिहा होगी.

सैंड्रा बुलक ने ये फिल्म सीधे सीधे ऑस्कर की चाहत में की है जैसे हैली बेरी ने ब्रूस्ड की थी. अभिनय अच्छा हो और कहानी में गलतियां हो तो अच्छे अभिनय से कितना फ़र्क़ पड़ेगा? बाक़ी किरदार सिर्फ खानापूर्ति करते हुए नज़र आते हैं. किसी भी एक्टर ने स्क्रिप्ट की बारीकियों का अध्ययन नहीं किया और न ही किरदारों की एक्शन का जस्टिफिकेशन समझने की कोशिश की. जो स्क्रिप्ट में लिखा है वो कर दिया है. बहन की तलाश थी या अपने पिता की मौत का बदला, ये समझ नहीं आता. आर्ट सिनेमा की तरह रफ़्तार रखी तो गयी है लेकिन कहानी इतनी बेतरतीब और बेढंगी है कि उसे अच्छी कहना ही गलत है. फिल्म का नाम द अनफॉरगिवेबल’ है. प्रश्न ये है कि किसे माफ़ करना चाहिए? अगर न देखी हो तो खुद को माफ़ कीजिये और देखने से बचिए.

डिटेल्ड रेटिंग

कहानी :
स्क्रिनप्ल :
डायरेक्शन :
संगीत :

Tags: Film review, The Unforgivable